Details, Fiction and Affirmation






सुमति ने अपनी खुली कमर को एक बार अपनी नर्म ऊँगली से छुआ. “उफ़… खुद की ऊँगली से ही मुझे एक गुदगुदी सी हो रही है.”, उसने सोचा. सुमति खुद अपने ही तन के रोम रोम में छुपे आनंद से अब तक अनजान थी. उसके खुद के स्पर्श से एक ऐसा एहसास हो रहा था उसे जो उसे मचलने को मजबूर कर रहा था. वो अपनी मखमली त्वचा पर धीरे धीरे अपनी उँगलियों को फेरने लगे. अपने पेट पर, अपनी नाभि पर और फिर धीरे धीरे अपने स्तनों के बीच के गहरे क्लीवेज की ओर. उसने अपनी आँखें बंद कर ली ताकि वो हर एक एहसास को और अच्छी तरह से महसूस कर सके. “क्या मैं खुद अपने स्तनों को छूकर देखूं? न जाने क्या होगा उन्हें छूकर , उन्हें दबाकर?”, वो सोचने लगी. बाहरी दुनिया से खुद को दूर करके सुमति सिर्फ और सिर्फ अपने अन्दर होने वाली हलचल को अनुभव करने में मग्न हो रही थी. और फिर उसने अपनी कुछ उंगलियाँ अपनी साड़ी के निचे से अपने स्तनों पर हौले से फेरी.

Your aware mind is such as the gardener that has a tendency to the soil. It’s your duty to pay attention to how this process performs, deciding on properly what reaches the interior garden — your subconscious.

“अच्छा लड़कियों… अब तुम्हारी महारानी आ चुकी है. सुमति कहाँ है? मेरी आज्ञा है कि वो तुरंत मेरे सामने पेश हो और आकर मुझे गले लगाए”, मधुरिमा ने आते ही अपनी हँसने खेलने वाली नौटंकी शुरू कर दी थी.

अंजलि ने सुमति की साड़ी पहनने में मदद की.

Will and Habit are both mental processes that closely relate to one another. It is similar approach we use in forming a behavior that we could also utilize to reprogram our Subconscious mind with any new behaviour which we plan to come up with a habit.

नमते आंटी! आइये आइये आप ही का इंतज़ार था”, सुमति अपने भाई रोहित की आवाज़ सुन रही थी. आखिर सुमति के सास-ससुर आ ही गए थे. उसने झट से अपने बालो को पीछे बाँधा और उनसे मिलने के लिए बाहर जाने को तैयार हो गयी. “मुझे जल्दी करनी होगी. वरना उन्हें अच्छा नहीं लगेगा कि उनकी होने वाली बहु उनके स्वागत के लिए बाहर तक नहीं आई. पर क्या मुझे यह फिक्र करनी चाहिए? एक औरत को तैयार होने में हमेशा से ज्यादा समय लगता है.. ये तो वो भी जानते होंगे.”, सुमति यह सब सोचते हुए अपने पल्लू और अपनी साड़ी को एक बार ठीक करते हुए पल्लू को हाथ में पकडे बाहर के कमरे की ओर जाने लगी. उसने अपने हाथों से पल्लू को पीठ पर से अपने दांये कंधे पर से सामने खिंच कर ले आई ताकि उसके स्तन और ब्लाउज को छुपा सके. सुमति एक पारंपरिक स्त्री की तरह महसूस कर रही थी इस वक़्त. उसने एक बार चलते हुए खुद को आईने में देखा. “साड़ी तो ठीक लग रही है. शायद रोहित और चैतन्य की तरह मेरे सास-ससुर को भी याद न होगा कि मैं कभी लड़का थी.

अब सभी निकलने को तैयार थे. चैतन्य ने अपनी कार घर के दरवाज़े पर ले आया. उसके पिताजी उसके साथ सामने बैठ गए. और कलावती, सुमति और रोहित एक साथ पीछे. सुमति बीच की सीट में बैठी थी. अब तो उसकी हाइट कम थी तो उसके पैर बीच की सीट में आराम से आ गए. औरत होने read more का एक फायदा और!, सुमति सोच कर मुस्कुरा दी. वैसे भी वो अपनी शादी की खरीददारी के बारे में सोच कर ही खुश थी. “सुमति बेटा, तुम्हे पता तो है न कि तुम शादी के दिन क्या पहनना चाहोगी?

A modern experiment by a team from Israel scores details against this place. Ran Hassin and colleagues applied a neat visual trick named Continual Flash Suppression To place info into participants’ minds without having them getting consciously aware about it. It'd sound unpleasant, but In point of fact it’s really pretty simple. The system requires benefit of The reality that we have two eyes and our brain commonly makes an attempt to fuse The 2 ensuing photographs into just one coherent view of the world.

“अब तुम शुरू मत हो जाना जी औरतों के कपडे के बारे में… तुम्हे कुछ तो पता नहीं होता कि दुल्हन को कितनी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. बड़े आये बातें करने वाले.”, कलावती ने प्रशांत को टोका और सभी हँस पड़े.

औरत का बदन भी एक पहेली की तरह होता है जिसे सुलझाना होता है. हर एक अंग पर स्पर्श एक बिलकुल अलग अहसास उस औरत में जगाता है. तभी तो आदमी औरत को हर जगह छूना चाहते है क्योंकि हर स्पर्श से वो औरत कुछ नए अंदाज़ में लचकती है, मचलती है. और सुमति के लिए तो ये स्पर्श का आनंद कुछ अधिक ही था. अब तो वो खुद एक औरत के जिस्म में थी. अपने खुद के स्पर्श से ही उसे आनंद मिल रहा था जैसा उसने पहले कभी अनुभव नहीं की थी. और इसलिए उसके अन्दर खुद को छूकर देखने की जिज्ञासा बढती जा रही थी. वो धीरे धीरे अपने तन पर अपनी उँगलियों को सहलाते हुए अपने हर अंग में छुपे हुए आनंद को भोगना चाहती थी.

Anyone can at times get up figuring out the solution to an issue that their subconscious has actually been focusing on.

सुमति वापस अपनी तैयारी में ध्यान देने लगी. पर उसका दिमाग उसे बेचैन किये जा रहा था. एक तरफ तो उसे अपने नए जिस्म में साड़ी पहनकर तैयार होते बड़ा अच्छा लग रहा था वहीँ दूसरी ओर, वो नाराज़ भी हो रही थी कि उसे अपने सास-ससुर के लिए तैयार होना पड़ रहा है, वो लोग जिनको वो जानती तक नहीं.

Now you are older, you still look at by yourself unintelligent. When individuals question you regarding your instructional background, you shy clear of answering.

When you continue to your mind employing Meditation procedures, you will be consciously and unconsciously reprogramming your Mind and that's why Meditation is vital for this process.

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